Sunday, May 24, 2009

ग़ज़ल

ख्वाब में जो कुछ देख रहा हूँ उसका दिखाना मुश्किल है
आईने में फूल खिला है हाथ लगाना मुश्किल है
उसके कदम से फूल खिले है मैंने सुना है चार तरफ
वैसे इस वीरान सेहरा में फूल खिलाना मुश्किल है
तन्हाई में दिल का सहारा एक हवा का झोंका था
वोह भी गया है सुए बयाबा उसका आना मुश्किल है
शीशा गरों के घरों में सूना है एक परी कल आई थी
वैसे ख्याल ओ ख्वाब है परियां उनका आना मुश्किल है
खवाब में जो कुछ देख रहा हूँ उसका दिखाना मुश्किल है
आईने में फूल खिला है हाथ लगाना मुश्किल है

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