Wednesday, May 13, 2009

ग़ज़ल

जो शजर बे लिबास रहते है
उनके साए उदास रहते है
चंद लम्हात की खुशी के लिए
लोग बरसो उदास रहते है
इत्तेफाक़न जो हंस लिए थे कभी
इन्तेकमन उदास रहते है
वोह भी पहचानते नही मुझको
जो मेरे आस पास रहते है
उनके बारे में सोचिये
जो मुसलसल उदास रहते है
जो शजर उदास रहते है
उनके साए उदास रहते है

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